बस्ती, 81 वर्षीय सत्येन्द्रनाथ मतवाला सम्मानित किये गये

     

बस्ती, प्रेम चन्द्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान और वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा गुरूवार को हिन्दी आलोचना सम्राट आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की 139 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी आयोजित कर साहित्यकारों ने वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ ‘मतवाला’ को ‘साहित्य पितामह’ सम्मान से अंग वस्त्र, श्रीफल, प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। 81 वर्षीय साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि आचार्य रामचन्द्र शुक्ल निबंधकार भी थे। 1939 में उन्होंने ‘चिंतामणि’ लिखी, जो काव्य की व्याख्या करने वाला निबंधात्मक ग्रंथ है। इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य निबंध भी लिखे हैं, जिनमें मित्रता, अध्ययन आदि शामिल हैं। निबंधों के साथ उन्होंने ऐतिहासिक रचनाएं भी की। इसमें ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ उनका अनूठा ऐतिहासिक ग्रंथ है। उन्होंने इतिहास लेखन में रचनाकार के जीवन और पाठ को समान महत्त्व दिया।

      कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. वी.के. वर्मा ने आचार्य शुक्ल को नमन् करते हुये कहा कि बस्ती की धरती ने अनेक वरिष्ठ साहित्यकार दिये हैं और सत्येन्द्रनाथ मतवाला उस परम्परा को आगे बढा रहे हैं। कहा कि बस्ती जनपद का इतिहास, बस्ती मण्डल का इतिहास का सम्पादन कर उन्होने ऐतिहासिक तथ्यों का मजबूत आधार तैयार किया है, निश्चित रूप से उनका प्रयास शोधार्थियों के लिये भी उपयोगी सिद्ध होगा।
वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि इक्कसवी शताब्दी में साहित्यकार और समाज का सेतु कमजोर हो रहा है। हमें अपनी जडो से प्रेरणा लेनी होगी। साहित्यकार अपने समय के ही नहीं भविष्य के भी प्रवक्ता होते हैं, आचार्य शुक्ल ने इसे सिद्ध किया। आज अगौना की माटी उन्हें प्रतिदिन नमन् करती है। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा और वी.के. मिश्र ने कहा कि आचार्य शुक्ल का ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ अनूठा ऐतिहासिक ग्रंथ है। उन्होंने इतिहास लेखन में रचनाकार के जीवन और पाठ को समान महत्त्व दिया। वे युगों तक याद किया जायेंगे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सन्तोष कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, हरीश दरवेश, सरदार जगबीर सिंह विनय कुमार श्रीवास्तव, नवनीत पाण्डेय, सामईन फारूकी, अरूण कुमार पाण्डेय, विनय कुमार मौर्य, नीरज कुमार वर्मा, हरिकेश प्रजापति, दीपक सिंह प्रेमी, राघवेन्द्र शुक्ल, गणेश प्रसाद आदि ने आचार्य शुक्ल को जयंती पर नमन् किया।

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