त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर तस्वीर साफ होने के बाद ग्राम प्रधान, बीडीसी से लेकर जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदार जीत हासिल करने के लिए हर पैतरा चल रहे हैं। अपने पक्ष में वोट करने को लेकर दावतों का दौर शुरू हो गया है। दावेदार होली की मस्ती के बहाने वोट पक्का करने के लिए जरूरी इंतजाम में जुट गए हैं। आबकारी विभाग के मानकों के मुताबिक, एक व्यक्ति छह बोतल से अधिक शराब नहीं खरीद सकता है, लेकिन दावेदार पूरी पेटी की डिमांड कर रहे हैं।

आबकारी विभाग को शराब बिक्री का लक्ष्य पूरा करने के लिए चुनाव, वैवाहिक सीजन के साथ होली का इंतजार रहता है। वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदारों पर कानून के अनुपालन की भी जिम्मेदारी है। जिसमें तय मानक से अधिक देसी, अंग्रेजी या बीयर की बिक्री नहीं की जा सकती है। कोई तय लिमिट से अधिक शराब रखे हुए पकड़ा जाता है तो आबकारी एक्ट में जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। पिछले ग्राम पंचायत के चुनाव तक सिर्फ देसी की डिमांड होती थी। लेकिन बदलाव के दौर में अंग्रेजी और बीयर की भी मांग दिख रही है। शराब के एक कारोबारी बताते हैं कि होली की तारीख के सात दिन पहले से बिक्री में इजाफा होता है। लेकिन पंचायत चुनाव को लेकर बिक्री में 50 फीसदी तक इजाफा हो गया है।
दावेदारों को थोक रेट में चाहिए शराब

ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों के लिए वोट सहेजने के लिए होली प्रमुख माध्यम है। ऐसे में दावेदार शराब कारोबारियों से थोक रेट में शराब की मांग कर रहे हैं। पीपीगंज के एक शराब कारोबारी कहते हैं कि अब एक-एक बोतल शराब का हिसाब रखना होता है। लेकिन दावेदार पेटी की मांग कर रहे हैं। वो भी थोक रेट में। वैसे चुनाव को लेकर कच्ची की भट्ठियां भी धधकने लगी हैं, लेकिन कस्बों और शहर से सटे गांवों में अंग्रेजी और बीयर की मांग बढ़ गई है।

खरीद कर घर में रख सकते हैं इतनी शराब

देशी मदिरा-1.5 लीटर मसाला और 1.5 लीटर सादा यानी कुल 3 लीटर

अंग्रेजी शराब-6 लीटर

बीयर-7.8 लीटर

पंचायत चुनाव को देखते हुए कच्ची शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर भट्ठियों को तोड़ा जा रहा है। मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। गांव में चौकीदारों और आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर के साथ समन्वय बिठाकर निगरानी कर रहे हैं। तय लिमिट से अधिक शराब बेचना और खरीदना दोनों गलत है। जो भी इसकी अनदेखी करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।