संविदा आयुष चिकित्सकों काली पट्टी बांधकर काम किया


संविदा आयुष चिकित्सकों काली पट्टी बांधकर काम किया

  बस्ती

मेन स्ट्रीम आयुष डॉक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की अपील पर सात सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत सभी संविदा आयुष चिकित्सकों का आंदोलन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। संविदा आयुष चिकित्सकों ने जिला मुख्यालय सहित सीएचसी एवं पीएचसी पर हाथों में काली पट्टी बांधकर कार्य किया।

एसोसिएशन जिलाध्यक्ष डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व की अपील पर सात सूत्रीय मांग पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य चिकित्साधिकारी बस्ती को भेजा गया था किन्तु मांगों पर अभी तक कोई विचार न किए जाने से कर्मियों में रोष है। संविदा आयुष चिकितकों को बहुत कम मानदेय दिया जाता है जबकि उनसे सर्वाधिक कार्य लिया जाता है। आयुष चिकित्सकों का मानदेय जहां वर्तमान में लगभग 40 हजार रुपया है वहीं एलोपैथिक चिकित्सकों का मानदेय 70 हजार प्रति माह है।

राज्य सरकार के अधीन कार्य कर रहे एमओसीएच आयुष चिकित्सकों का मानदेय भी 60 हजार है, जबकि एनएचएम आयुष चिकित्सकों को पद के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। यह असमानता दूर होनी चाहिए। काली पट्टी बांधकर कार्य करने वालों में मुख्य रूप से डॉ. प्रदीप शुक्ल, डॉ. अनिल मिश्र, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. वंदना तिवारी, डॉ. सुनील सौरभ, डॉ. दिनेश सिंह कुश्वाहा, डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. साजिया खान, डॉ. भावना गुप्ता आदि शामिल रहे।

25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि को लेकर किया प्रदर्शन

घघौवा (बस्ती)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत में बुधवार को संविदा कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया। राज्य कर्मचारी संयुक्त संघ परिषद से संबद्ध बेसिक हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन एवं एनएचएम कर्मचारी और पदाधिकारियों की अपील पर यह विरोध प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य कर्मियों ने मांग किया कि 25 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि और एनएचएम संविदा कर्मचारियों को राजकीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की तरह समान वेतन दिया जाए। कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध के साथ ड्यूटी किया। बीसीपीएम जयशंकर त्रिपाठी ने बताया कि राज्य कर्मचारी संयुक्त संघ परिषद से संबद्ध बेसिक हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन एवं एनएचएम कर्मचारियों के संगठन ने प्रदेश सरकार की दोहरी नीति के विरोध में प्रदर्शन किया।

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