बस्ती,गौर थाना से पुलिस लाइन तक सम्मान की चमक,थानाध्यक्ष संतोष कुमार बने इंस्पेक्टर, एसपी–एएसपी ने लगाया स्टार



 बस्ती / की पुलिस व्यवस्था में सोमवार का दिन गौरव और प्रेरणा का प्रतीक बन गया, जब थाना गौर के थानाध्यक्ष संतोष कुमार को उनके उत्कृष्ट कार्य, अनुशासित सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के लिए इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया। पुलिस लाइन में आयोजित सादे लेकिन गरिमामय समारोह में पुलिस अधीक्षक अभिनंदन एवं अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत ने उनके कंधों पर इंस्पेक्टर का स्टार लगाकर सम्मानित किया।
यह केवल एक पदोन्नति नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और फील्ड पर दिखने वाले नेतृत्व की औपचारिक मान्यता मानी जा रही है। समारोह के दौरान मौजूद पुलिस अधिकारियों व जवानों ने तालियों की गूंज के साथ इंस्पेक्टर संतोष कुमार का उत्साहवर्धन किया।
कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने संतोष कुमार
थाना गौर में तैनाती के दौरान संतोष कुमार ने जिस तरह से कानून-व्यवस्था को मजबूत किया, वह जनचर्चा का विषय रहा। अपराध नियंत्रण, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और आम जनता के साथ संवाद की उनकी शैली ने उन्हें एक जनप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
सूत्रों की मानें तो कई जटिल मामलों में उनकी रणनीतिक कार्यशैली और निष्पक्ष कार्रवाई ने पुलिस की साख को मजबूत किया।
इस अवसर पर एसपी अभिनंदन ने कहा कि “संतोष कुमार ने फील्ड में रहते हुए जिस समर्पण और अनुशासन का परिचय दिया है, वह अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। पदोन्नति उनके निरंतर अच्छे कार्यों का परिणाम है।”
एएसपी श्यामकांत ने भी उम्मीद जताई कि नई जिम्मेदारी में वे और अधिक प्रभावी ढंग से जनपद की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।
इंस्पेक्टर बनने की खबर मिलते ही थाना गौर सहित पूरे पुलिस महकमे में खुशी की लहर दौड़ गई। सहकर्मी अधिकारियों और अधीनस्थ जवानों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। वहीं क्षेत्रीय नागरिकों ने भी इसे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसिंग की जीत बताया।
स्टार लगने के बाद इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने कहा कि “यह पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है। आगे भी जनता की सुरक्षा, न्याय और भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।”
उनके शब्दों से स्पष्ट था कि पद बढ़ा है, लेकिन जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
जनपद बस्ती पुलिस में यह पदोन्नति एक स्पष्ट संदेश देती है—
जो ईमानदारी से काम करेगा, कानून के दायरे में रहकर जनता के साथ खड़ा रहेगा, वही आगे बढ़ेगा।
थाना गौर से पुलिस लाइन तक का यह सफर केवल संतोष कुमार का नहीं, बल्कि उस सोच का है जो मेहनत को पहचान देती है।

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